यह ब्लाग रफकार्य टाइमपास हेतु परिकल्पना पर आधारित लेख लिखा है आप अपनी जिम्मेदारी पर पढ़ेंगे। आपकी भावना आहत हो सकती है, मुस्लिम भाग जायेंगे वाक्य में मुस्लिम शब्द के स्थान पर दुष्ट-भ्रष्ट शब्द पढ़ें। भारत श्रेष्ठ आध्यात्मिक राष्ट्र होगा तीन और पच्चीस कानून लागू करें देखना मुफ्तवादी ब्राम्हण मौलाना फादर देश छोड़कर भाग जायेंगे।
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रविवार, 4 अगस्त 2024
ईश्वरवाद ऐय्याशी सिद्धान्त समस्या का निवारण
ईश्वरवाद ऐय्याशी सिद्धान्त
मुस्लिम की ज्ञान क्षमता नहीं है बिना हथियार विजयी नहीं हो सकता
दुनियाँ में जब तक कुरान रहेगा तब तक शान्ति नहीं आ सकती पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ के कथन का समर्थन करता हूँ
मुस्लिम मनुष्यों को अपराध करना सिखाया कर्म से संसार रचयिता को कमजोर बुद्धिहीन बताया
सारे संसार रचयिता की उपासना करने वाला धरती के मनुष्यों को झूठ बोलना हत्या करना हत्या का भय दिखाकर बात मनवाना विकृत राजनीति करना किसी की सम्पत्ति बाहुबल हडपना नहीं सिखायेंगे सीधा जेल होगी आप सारे संसार रचयिता के पक्ष में खड़े होकर अपराध करना नहीं सिखायेंगे अपराध से मुक्त रहना बचाना सिखायेंगेभ्रष्ट मुसलमानों हिन्दुओं की ज्यादतीयों से बचना चाहते हो
*- अब भारत भ्रष्ट मुसलमानों की भ्रष्ट हिन्दुओं की भ्रष्ट राजनीति से आजाद होगा।
सीमा कुशवाहा (सुप्रीमकोर्ट-वकील) सुप्रीमकोर्ट में यह याचिका दायर करोगी- क्या ईश्वर की बात कहने वाले का आचरण ऐसा होना चाहिए।
दान दाता और दान ग्रहण करने वाला — सम्पत्ति का स्वामी नहीं
जगत्-रचना और सम्पत्ति का मूल स्वामी रचयिता है। दाता और ग्रहणकर्ता केवल व्यवस्था करने वाले हैं — न कि अन्तिम स्वामी।
दान देने या लेने वाला व्यक्ति किसी भी वस्तु (अनाज, फल-फूल, धन, पशु-पक्षी आदि) का अंतिम स्वामी नहीं होता। यह सत्य निम्न बातों से स्पष्ट है:
- रचना-क्रम: पहले सूरज-धरती-चन्द्रमा आदि बने; फिर इन पर वनस्पति और जीवो का निर्माण हुआ — इसलिए सम्पत्ति की उत्पत्ति रचयिता-निर्मित है। यह स्वतः सिद्धान्त पर आधारित रचना है
- स्वामित्व का सिद्धांत: दान दाता और दान प्राप्तकर्ता केवल व्यवस्थापक हैं — वे केवल देने/लेने की क्रिया में संलग्न होते हैं।
- हक़-हिसाब नहीं: कोई भी मानव यह दावा नहीं कर सकता कि वह सम्पत्ति का परम स्वामी है; इसलिए 'दान देने का अंतिम अधिकार' किसी व्यक्ति या संस्था के पास नहीं ठहरता।
यह मनुष्य और इंसान की साजिश नहीं जीव सृष्टा और धारण कर्ता की है (सीमा सम्रीद्धि कुशवाहा ) सुप्रीमकोर्ट वकील
ऐसा प्रतीत होता है
वर्तमान में प्रस्तावित 21 कानून इस कथन को सत्यापित करता है
आप धरती पर धर्म स्थापना के समय को देखें उनके आपसी तनाव को देखें इनके साथ साथ विज्ञान के विस्तार को देखें इन धर्म उपदेशक के मध्य अपने-अपने धर्म-ग्रन्थ को लेकर तनाव-पूर्ण वातावरण बनाते हुए दावेदारी करें छल-कपट करें दुरूपयोग करें तब आम नागरिक सरलता-पूर्वक तनाव-रहित उन दोषों को दूर कर सके तनाव-मुक्त जीवन ब्यतित करें
आपके धर्मग्रन्थ में एक तुफान छिपा है इस तुफान का असर कम करने के लिए कानून की दीवार चाहिए
ईश्वर-अल्लाह- भगवान नाम का ब्यापार धर्मग्रंथ का दुरूपयोग मेरा भारत 21 कानून से बंद करेंगे
आपके सामने समस्याएं थी जिसका अविस्मर्णीय समाधान बता दिया है
इसलिए प्रस्तावित कानून की प्रशंसा नहीं किया क्योंकि यह मेरा सुझाया कानून है
मेरा अनुमान है यह एक ऐतिहासिक कानून होगा महोदय कट्टर इस्लामिक देश की जनता धर्मगुरुओं से परेशान है
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सोमवार, 15 जुलाई 2024
रविवार, 7 जुलाई 2024
न्यायालय में धर्मगुरुओं और वकील से पूछे जाने वाले प्रश्न
मूलाधार निवासी संसार रचयिता स्वामी को कोटि कोटि नमस्कार प्रणाम
मुस्लिम सिर्फ अल्लाह की इबादत क्यों करते हैं और दूसरों को विवश क्यों करते हैं
सोमवार, 3 जून 2024
25 कानून, तीन कानून लाओ सरलता से भारत मुस्लिम मुक्त हो जायेगा
BHARAT BHUMI
देश को मुफ्तवादी ब्राम्हण - मौलाना दोनों से परेशानी है।
इस परेशानी का समाधान बहुत सरल है।
तीन कानून लाओ मुफ्तवादी ब्राम्हण मौलाना भगाओ। श्रेष्ठ आध्यात्म गुरु से शिक्षा ज्ञान प्राप्त करें।
कोर्ट में जनहित याचिका हेतु आदि सत्य रक्षक तीन कानून लागू करने हेतु वकील को दिया जाय
ब्राम्हण - मौलानाा, आप केवल भूमंडल-सौरमंडल के सृजनकर्ता पालन-पोषण कर्ता को बतायेंगे, हम समस्त संसार के रचयिता उपासक हैं। आकाशगंगा रचयिता के, भूमंडल-सौरमंडल के पालन-पोषण कर्ता के उपासक हैं! आप सरकार और न्यायालय को, आम नागरिक को नहीं बतायेंगे, आप किस शक्ति रचयिता के उपासक हैं।
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