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सोमवार, 5 अगस्त 2024

दुष्ट भ्रष्ट ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई धर्म-प्रचारक मुक्त भारत

चुटकियों का काम हजारों वर्ष से परेशान है भारत
दुष्ट भ्रष्ट मुफ्तवादी ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई मुक्त भारत

तीन कानून लाओ दुष्ट धर्म-प्रचारक से मुक्ति पाओ
उद्धेश्य :- भारत देश में आध्यात्मिक शान्ति स्थापित करना
जो समुदाय धर्म निरपेक्ष कानून के आवश्यकता गुण धर्म विशेषता की  पूर्ति नहीं करता, उस समूह समुदाय को कानून का लाभ नहीं दिया जा सकता, कुम्भ मेला के सम्बन्ध में  साधू संतों का निर्णय सही है, हिन्दू समुदाय और सत्य को मिटाने वाला समुदाय कुम्भ मेला में नहीं होना चाहिए ब्यापार के अवसर पर प्रति बन्ध ठीक है, 
दुःख इस बात का होगा सच्ची श्रद्धा से संसार रचयिता को मानने वाले साधारण परिवार को नुकसान होगा, आध्यात्म ग्रन्थ के ब्यापारी राजनीति रोटी सकेंगे, यह अनुचित है,  
मार्कण्डेय पुराण एवं मार्कण्डेय ऋषि की संक्षिप्त व्याख्या [ लेख आधार https://www.jagatgururampalji.org/en/markandeya-puran/#MarkandeyaRishi द्वारा प्रकाशित ]

    देश में तनाव बढ़ाने वाले, दान-चंदा लेने वाले, मुफ्त खाने वाले दुष्ट भ्रष्ट मुफ्तवादी ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई धर्म-प्रचारक गाँव-देश छोड़कर चले जायेंगे। क्योंकि सभी धर्म-प्रचारक को मेहनत करके खाना होगा इसलिए। हम नागरिक भी परिश्रम करके खाते हैं। अतः सभी श्रेष्ठ अच्छे परिश्रमी सत्य-वक्ता आध्यात्मिक-गुरु धर्म का प्रचार धर्म का संरक्षण करेंगे।

तीन कानून लाओ :- दुष्ट धर्म-प्रचारक से मुक्ति पाओ

    देश में तनाव बढ़ाने वाले, दान-चंदा लेने वाले, मुफ्त खाने वाले,  दुष्ट भ्रष्ट मुफ्तवादी ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई धर्म-प्रचारक गाँव-देश छोड़कर चले जायेंगे।
    क्या नागरिक बंधू स्वीकार करते हैं। भगवान परमात्मा ईश्वर अल्लाह देवी देवता नबी-पैगम्बर यहोवा का उपासक भक्त पुजारी धर्मगुरु धर्म-प्रचारक मेहनत करके खाने में असमर्थ निकम्मा हो जाता है। इसलिए धर्मगुरु धर्म-प्रचारक संरक्षक दान चंदा लेते हैं मुफ्त में खाते हैं।
अतः हम भारतीय नागरिक को आलसी निकम्मा नहीं बनना है दुष्टों से बचना है।
अतः सभी आध्यात्मिक धर्मगुरुओं उपासक धर्म-प्रचारक को मेहनत करके खाना होगा।
सभी धर्म के लोग कानून पसन्द केरेंगे।
दुष्ट धर्म-प्रचारक से ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई नागरिक भी परेशान हैं।

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