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सोमवार, 5 अगस्त 2024

दुष्ट भ्रष्ट ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई धर्म-प्रचारक मुक्त भारत

चुटकियों का काम हजारों वर्ष से परेशान है भारत
दुष्ट भ्रष्ट मुफ्तवादी ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई मुक्त भारत

तीन कानून लाओ दुष्ट धर्म-प्रचारक से मुक्ति पाओ
उद्धेश्य :- भारत देश में आध्यात्मिक शान्ति स्थापित करना
जो समुदाय धर्म निरपेक्ष कानून के आवश्यकता गुण धर्म विशेषता की  पूर्ति नहीं करता, उस समूह समुदाय को कानून का लाभ नहीं दिया जा सकता, कुम्भ मेला के सम्बन्ध में  साधू संतों का निर्णय सही है, हिन्दू समुदाय और सत्य को मिटाने वाला समुदाय कुम्भ मेला में नहीं होना चाहिए ब्यापार के अवसर पर प्रति बन्ध ठीक है, 
दुःख इस बात का होगा सच्ची श्रद्धा से संसार रचयिता को मानने वाले साधारण परिवार को नुकसान होगा, आध्यात्म ग्रन्थ के ब्यापारी राजनीति रोटी सकेंगे, यह अनुचित है,  
मार्कण्डेय पुराण एवं मार्कण्डेय ऋषि की संक्षिप्त व्याख्या [ लेख आधार https://www.jagatgururampalji.org/en/markandeya-puran/#MarkandeyaRishi द्वारा प्रकाशित ]

    देश में तनाव बढ़ाने वाले, दान-चंदा लेने वाले, मुफ्त खाने वाले दुष्ट भ्रष्ट मुफ्तवादी ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई धर्म-प्रचारक गाँव-देश छोड़कर चले जायेंगे। क्योंकि सभी धर्म-प्रचारक को मेहनत करके खाना होगा इसलिए। हम नागरिक भी परिश्रम करके खाते हैं। अतः सभी श्रेष्ठ अच्छे परिश्रमी सत्य-वक्ता आध्यात्मिक-गुरु धर्म का प्रचार धर्म का संरक्षण करेंगे।

तीन कानून लाओ :- दुष्ट धर्म-प्रचारक से मुक्ति पाओ

    देश में तनाव बढ़ाने वाले, दान-चंदा लेने वाले, मुफ्त खाने वाले,  दुष्ट भ्रष्ट मुफ्तवादी ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई धर्म-प्रचारक गाँव-देश छोड़कर चले जायेंगे।
    क्या नागरिक बंधू स्वीकार करते हैं। भगवान परमात्मा ईश्वर अल्लाह देवी देवता नबी-पैगम्बर यहोवा का उपासक भक्त पुजारी धर्मगुरु धर्म-प्रचारक मेहनत करके खाने में असमर्थ निकम्मा हो जाता है। इसलिए धर्मगुरु धर्म-प्रचारक संरक्षक दान चंदा लेते हैं मुफ्त में खाते हैं।
अतः हम भारतीय नागरिक को आलसी निकम्मा नहीं बनना है दुष्टों से बचना है।
अतः सभी आध्यात्मिक धर्मगुरुओं उपासक धर्म-प्रचारक को मेहनत करके खाना होगा।
सभी धर्म के लोग कानून पसन्द केरेंगे।
दुष्ट धर्म-प्रचारक से ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई नागरिक भी परेशान हैं।

पूरा पढ़िये

यह कानून आध्यात्म शास्त्र दिखाने वालों की तरफ से आना चाहिए था। लेकिन किसकी तरफ से आया है। सृजित पक्ष की तरफ से

    1 कानून:-  आध्यात्मिक ब्यक्ति धर्मगुरु धर्म-प्रचारक सत्यापित नहीं करेंगे भगवान परमात्मा ईश्वर अल्लाह की उपासना करने वाला आलसी निकम्मा हो जाता है मेहनत करके खाने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसा सत्यापित करने पर तीन वर्ष जेल हो जही।
    2 कानून :- जो धर्मगुरु धर्म-प्रचारक मेहनत करके नहीं खायेंगे दान चंदा लेंगे ऐसे लोग धर्म का प्रचार प्रसार नहीं करेंगे! सीमित घरों से भिक्षा लेकर जीवन यापन करने पर प्रतिबन्ध नहीं है। कानून का उलन्घन करने पर तीन वर्ष जेल होगी।
    3 कानून:-  आध्यात्मिक धर्मगुरु और उपासक सृष्टि का इतिहास, धरती का इतिहास, मानव जीवन का इतिहास, सही बताएँगे! गलत जानकारी, मति-भ्रामक जानकारी देने पर तीन वर्ष जेल होगी। वैज्ञानिक पुरातत्व इतिहास-कार की रिपोर्ट संलग्न करेंगे।
    ब्राम्हण साधू संत फकीर फादर मौलाना की चिंता करोगे। तब देश में तनाव बढ़ाने वाले, दान-चंदा लेने वाले, मुफ्त खाने वाले, दुष्ट-भ्रष्ट मुफ्तवादी धर्म-प्रचारक ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई से मुक्ति नहीं मिलेगा।
धर्मगुरु धरती पर आध्यात्मिक शासन स्थापित नहीं करेंगे,

मुस्लिम की औकात नहीं है

सृष्टि और धरती का सही इतिहास बता सके, वह हथियार बलबूते केवल मनवा सकता है, बिना हथियार बात कर सके गलत इतिहास बताने वालों को रोक सके, बस इतना काम मुस्लिम कर लेगा, मुस्लिम लोगों में शान्ति स्थापित हो जाएगा,

सुप्रीम कोर्ट का टारगेट

1 दुष्टों आध्यात्मिक गुरुओं को सुधारना 2 सरकारी खजाना में बढ़ोतरी 3 पब्लिक को तनाव से राहत
जितना ज्यादा शोर होगा 1 उतना ज्यादा फायदा 2 सरकारी खजाना में बढ़ोतरी 3 दुष्टों आध्यात्मिक गुरुओं को जेल होगी
बस तोड़ फोड़ जान माल सम्पत्ति हानि बचाना है

न्यायालय आध्यात्म शास्त्र के अतिरिक्त अन्य साक्ष्य प्रस्तुत क्या जाए 

न्यायालय से तीन प्रश्न

पहला प्रश्न न्यायालय सरकार ब्राम्हण मौलाना विवाद से परेशानअथवा नहीं है
दूसरा प्रश्न न्यायालय सरकार को तीन कानून चाहिए अथवा नहीं
तीसरा प्रश्न क्या न्यायालय सरकार मानती है भारतीय नागरिक ब्राम्हण हिन्दू मुस्लिम विवाद से परेशान है

न्यायालय, सरकार, हम सभी, सारे संसार बनाने वाले की, उपासना, अस्तुति करते हैं, जब से पता चला है, सारे संसार बनाने वाले का, उपासक, भक्त, आलसी निकम्मा हो जाता है, तब से, हमने, दिल्ली के स्टेशन पर, डेरा डाला है, हम सारे लोग,सारे संसार बनाने वाले की, उपासना, अस्तुति करके, आलसी निकम्मा, हो गए हैं, इसलिए, न्यायालय सरकार, खाना उपलब्ध कराये, यदि खाना उपलब्ध नहीं कराएँगे, तब, ट्रेन का आना जाना, बन्द हो जाएगा, यदि खाना उपलब्ध होगा, तब ट्रेन का, आना जाना, जारी रहेगा सरकार न्यायालय, सारे धर्मगुरुओं से, धनराशी लेकर, स्टेशन पर, डेरा डाले, सारे संसार के उपासक, भक्त, जो उपासना, अस्तुति के कारण, आलसी, निकम्मा, हो गए है, उन सभी को, खाना उपलब्ध कराएँगे,

एक कहानी सुनों

बुद्धिमान ब्यक्ति किनारे बैठा है, और गधों की फौज शासन कर रही है
भीड़ बूते जो शासन करे, उसे कुत्तों की फौज कहते हैं
गवर्मेन्ट योजना कुत्तों की फौज इकठ्ठा होने दो,  फिर कार्यवाई होगी
कुरान के हवाले से कायनात दुनियां संसार अल्लाह ने बनाई
क्या इतिहास के पन्नों से सत्यापित होता है, कुरान और कुरान की आयतें सही है
इतिहास के किस समकाल से सत्यापित होता है क्या सभी समयकाल से सत्यापित होता है 
क्या कुरान के अतिरिक्त कितने आध्यात्म शास्त्र है जिससे सत्यापित होता है, दुनियां संसार अल्लाह ने बनाई है, क्या धर्म प्रचारक विश्व राष्ट्र राज्य का पालन पोषण करने वाला होता है अनाज फल फूल उपलब्ध करते हैं, संसार रचयिता को सम्मान को हानि पहुंचाने वाले की हत्या कर देना, मुस्लिम कथन हैं,

मुस्लिम के ऊपर आरोप पत्र 
मुस्लिम सही जानकारी नहीं देता दुनियां किसने बनाया मैं कुरआन को साक्ष्य नहीं मानता क्योकि उसके साथ सत्यापित इतिहास पुरातत्वेता की रिपोर्ट संलग्न नहीं है    

कुत्तों की फौज ने कहा ये गाँव हमारा है ये शहर हमारा है हम राज करेंगे बांकी लोग यह गाँव खाली करो नहीं तो हमारी गुलामी करो हमारा धर्म स्वीकार करो उन्हें रोकने पुलिस आया उनको थप्पड़ मारकर भगा दिया सारे पुलिस वाले जी हुजुर करते हुये आगे बढ़ते रहे क्योंकि सभी चाहते थे कुत्तों की फौज इकठ्ठा हो जाए तब सारे पुलिस और मिलिट्री बाहर आएगी और कुत्तों की फौज को बताएगी जो पुलिस वाला तुमसे मार खाया वह चाहता तो वहीँ कूट देता लेकिन सभी चाहते थे कुत्तों की फौज इकठ्ठा हो जाए तब कार्यवाही की जायेगी अब तीन कानून लागु होगा

एक कहानी सुनों

याद रखो, भीड़ बलबूते, जो आगे बढ़े, उसे, कुत्तों की फौज कहते हो,
बुद्धिमान ब्यक्ति, किनारे बैठा है, गधों की फौज, शासन कर रही है,
जो, भीड़ बूते शासन करे, उसे, भेड़िया और कुत्तों की फौज कहते हो,
न्यायालय, गवर्मेन्ट योजना, भेड़िया और कुत्तों की फौज को,मुफतवादी धर्मगुरुओं की फौज को, इकठ्ठा होने दो, फिर कार्यवाई होगी,
   भेड़िया और कुत्तों की फौज ने, मुफतवादी धर्मगुरु, धर्म प्रचारक, मौलाना, इमाम, जिहादी, साधू, संत, ब्राम्हण ने , कहा, ये गाँव हमारा है, ये शहर हमारा है, हम राज करेंगे ,बांकी लोग, यह गाँव खाली करो, नहीं तो, हमारी गुलामी करो, हमारा धर्म स्वीकार करो, उन्हें रोकने पुलिस आया, लेकिन भेड़िया और कुत्तों की फौज ने, मुफतवादी धर्मगुरुओं ने, उनको थप्पड़ मारकर भगा दिया, सारे पुलिस वाले, जी हुजुर करते हुये आगे बढ़ते रहे, क्योंकि, सभी चाहते थे, भेड़िया और कुत्तों की फौज, मुफतवादी धर्मगुरुओं की फौज, इकठ्ठा हो जाए, तब सारे पुलिस और मिलिट्री बाहर आएगी, और, भेड़िया और कुत्तों की फौज, मुफतवादी धर्मगुरुओं की फौज को बताएगी, जो पुलिस वाला, तुमसे मार खाया, वह चाहता तो, वहीँ कूट देता ,लेकिन सभी चाहते थे, भेड़िया और कुत्तों की फौज,मुफतवादी धर्मगुरुओं की फौज, इकठ्ठा हो जाए, तब कार्यवाही की जायेगी, अब, तीन कानून लागु हो गया है, अब, भेड़िया और कुत्तों की फौज को ,मुफतवादी धर्मगुरुओं की फौज को, बतायेंगे, तीन कानून का मतलब क्या है, सारे मुफतवादी धर्मगुरु, धर्म प्रचारक, मौलाना, इमाम, जिहादी, साधू, संत, ब्राम्हण मेहनत करके खाओगे, शारीरिक परिश्रम करके खाओगे, दान चंदा लिया, तब सीधे जेल जाओगे, जय हिन्द, जय भारत,

न्यायालय क्या उपासना करने वाला आपका नागरिक शारीरिक परिश्रम करके खाने में असमर्थ आलसी निकम्मा हो जाता है यदि उपासना कराने वाला आध्यात्मिक जीव जीव-समुह के पास यही उत्तर है, तब इस स्थिति में उपासना कराने पर प्रतिबन्ध लगाना होगा, प्रश्न के उत्तर के सम्बन्ध ,उपासना कराने वाला आध्यात्मिक जीव जीव-समुह को ब्यवहारिक उत्तर प्रस्तुत करना होगा

आध्यात्मिक जीव उपासना कराने वाला प्रश्न का उत्तर प्रस्तुत करें

उपासना करने वाले नागरिक का अधिकार है उपासना कराने वाला जीव जीव-समुह [गर्भजन्मा अथवा अजन्मा] से उत्तर प्राप्त करे, उपासना करने वाला जीव जीव-समुह [गर्भजन्मा अथवा अजन्मा] शारीरिक परिश्रम करके खाने में असमर्थ आलसी निकम्मा होता है अथवा बहूत परिश्रमी बुद्धिमान होता है आध्यात्मिक जीव उपासना कराने वाला उपरोक्त प्रश्न का ब्यवहारिक उत्तर प्रस्तुत करें काल्पनिक उत्तर देना अपराध होगा,  जिस उपासना कराने वाले  जीव से  समाज को कष्ट परेशानी है, उस जीव को उपासना कराने वाले समाज से बाहर किया जाएगा, उसे शारीरक परिश्रम करके खाने वाले समाज समूह का सदस्य बनना होगा, 

    न्यायालय सरकार उत्तर दें, पहला प्रश्न, न्यायालय सरकार, क्या साधना उपासना करने वाला आपका नागरिक, शारीरिक परिश्रम करके खाने में असमर्थ, आलसी निकम्मा हो जाता है, यदि आपके पास उत्तर हाँ में है, ऐसी परिस्थिति में न्यायालय सरकार आपका कोई भी नागरिक उपासना नहीं करेंगे, और दूसरों से उपासना नहीं करायेंगे, यदि स्वतन्त्रता नियम का उपयोग करते हैं ,ऐसी परिस्थिति में वह ब्यक्ति समूह समुदाय, दुसरे की स्वतन्त्रता पर अंकुश नहीं लगायेंगे, उपरोक्त नियम का उलन्घन करने पर जेल होगा,
    दूसरा प्रश्न, यदि साधना उपासना कराने वाला, आध्यात्मिक जीव जीव-समुह के पास, यही उत्तर है, जो पहला प्रश्न का उत्तर है, ऐसी परिस्थिति में न्यायालय सरकार द्वारा, ऐसे समुह समुदाय द्वारा, साधना उपासना कराने पर प्रतिबन्ध लगाना होगा, न्यायालय सरकार आपका कोई भी नागरिक साधना उपासना नहीं करायेंगे, उपरोक्त प्रश्न के उत्तर के सम्बन्ध में ,साधना उपासना करने और साधना उपासना कराने वाला, आध्यात्मिक जीव जीव समुह को, ब्यवहारिक उत्तर प्रस्तुत करना होगा,आध्यात्मिक जीव, साधना उपासना कराने वाला, साधना उपासना करने वाला ,उपरोक्त प्रश्न का ब्यवहारिक उत्तर प्रस्तुत करें,
    न्यायालय सरकार ,संसार में, उपासना करने वाले नागरिक का अधिकार है, आध्यात्मिक साधना उपासना कराने वाला, आध्यात्मिक प्रचार करने वाला, जीव, जीवसमुह, गर्भजन्मा अथवा अजन्मा से उत्तर प्राप्त करे, साधना उपासना करने वाला जीव, जीव समुह गर्भजन्मा अथवा अजन्मा, शारीरिक परिश्रम करके खाने में असमर्थ, आलसी निकम्मा होता है, अथवा बहूत परिश्रमी शक्तिमान बुद्धिमान होता है, आध्यात्मिक जीव जीवसमुह, साधना उपासना कराने वाला, उपरोक्त प्रश्न का ब्यवहारिक उत्तर प्रस्तुत करें, काल्पनिक उत्तर देना अपराध होगा, 
    जिस आध्यात्मिक साधना उपासना कराने वाले जीव से, समाज को कष्ट परेशानी है, उस आध्यात्मिक जीव को, आध्यात्मिक साधना उपासना कराने वाले समाज से बाहर किया जाएगा, उसे शारीरक परिश्रम करके खाने वाले, समाज समूह का सदस्य बनना होगा, 
     न्यायालय सरकार, आध्यात्मिक शासक, साधना, उपासना द्वारा, जीवित सम्पत्ति का, ब्यापार नहीं करेंगे, उपासक की उपासना से प्राप्त, जड़ चैतन्य, जीवित सम्पत्ति का, स्थाई स्वामी बताना अपराध है, कारण, वह सम्पत्ति, उपासक की शारीरिक बौद्धिक परिश्रम से निर्मित, जीवित जड़ अथवा चैतन्य सम्पत्ति नहीं है, वह धरती पर भोजन से प्राप्त सम्पत्ति है, 
अंतरिक्ष व संसार में, शूक्ष्म से वृहद जीवित गुण निराकार से आकार शरीर में ,  जीवित स्वस्थ रहना अपराध नहीं है, लेकिन, जीवित स्वस्थ रहकर दुसरे को अस्वस्थ बीमार करना अपराध है, 
ऐसे आध्यात्मिक ब्यक्ति, जीव, जीव-समुह द्वारा ,साधना उपासना करने और दूसरों से साधना उपासना कराने पर प्रतिबन्ध लगाना होगा,
न्यायालय प्रतिबन्ध लगाये
जो, आध्यात्मिक ब्यक्ति, धर्मप्रचारक, धर्मगुरु, शारीरिक श्रम से, जिस श्रम से शरीर से पसीना बहता है, और उस श्रम का कोई पारि श्रमिक मूल्य देता हो,
ऐसा शारीरिक परिश्रम से प्राप्त धनराशी का उपयोग नहीं करते, ऐसे लोग, न्यायालय में अपना आध्यात्मिक पक्ष नहीं रख सकते,
पहले आध्यात्मिक ब्यक्ति, अपने कथन को सत्यापित करें, उसके पश्चात, आध्यात्मिक ब्यक्ति अपना आध्यात्मिक पक्ष न्यायालय में रखेंगे,
आध्यात्मिक ब्यक्ति, धर्मप्रचारक, धर्मगुरुओं ने कहा, सारे संसार रचयिता, संसार रचयिता, भगवान, परमात्मा, ईश्वर, परमेश्वर, अल्लाह, यहोवा का उपासक, भगत, बन्दा, आध्यात्मिक ब्यक्ति, शारीरिक परिश्रम करने में, बहुत सक्षम सामर्थ्यवान होता है,
इस कथन के सम्बन्ध में प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करें, 
मूल प्रश्न, आध्यात्मिक पक्ष, यह कौन सा पक्ष है, मशीन के उपयोग समयकाल में, धर्मगुरु धर्मप्रचारक आध्यात्मिक ब्यक्तियों को, किस धनराशी का उपयोग करना चाहिए, आध्यात्मिक पक्ष मशीन का उपयोग करने वाला पक्ष है, अथवा शारीरिक बौद्धिक शक्तियों का उपयोग करने वाला पक्ष है, उत्तर क्या है,

न्यायालय उत्तर मांगे

प्रश्न, क्या सारे संसार रचयिता, संसार रचयिता, भगवान, परमात्मा, ईश्वर, परमेश्वर, अल्लाह, यहोवा का उपासक, भगत, बन्दा, आध्यात्मिक ब्यक्ति शारीरिक श्रम, जिस श्रम से शरीर से पसीना बहता है, ऐसा शारीरिक परिश्रम करके खाने में असमर्थ, आलसी निकम्मा हो जाता है, अथवा, केवल ब्यवसाय से प्राप्त, प्रेरित सिद्धांत से प्राप्त, खेती से प्राप्त धनराशी सम्पत्ति का उपयोग करता है, अथवा बहुत परिश्रमी होता है, श्रम सिद्धांत, जिस श्रम से शरीर से पसीना बहता है, और उस श्रम का कोई पारि श्रमिक मूल्य देता हो, ऐसे श्रम सिद्धांत से प्राप्त धनराशी का उपयोग करता है, आध्यात्मिक ब्यक्ति, ब्राम्हण साधू संत मौलाना इमाम जिहादी से, इस प्रश्न का उत्तर मांगे, और तीन कानून लागु करें,
देखना, भारत को, मुस्लिम राष्ट्र बनाने के बात कहने वाले, भारत, हिन्दुस्तान छोड़ देंगे,
जय हिन्द, जय भारत, वन्दे मातरम
न्यायालय में मस्तिष्क कि रिपोर्ट प्रस्तुत कि जाएगी, 
सारे संसार रचयिता का साधक कठिन परिश्रम नहीं कर सकता 

धर्मगुरु से प्रश्न पूछें यह कानून किसकी तरफ से आना चाहिए था
सभी नागरिक कहेंगे, 
ब्राम्हण मौलाना धर्मशास्त्र नहीं, मेहनत की रोटी सम्पत्ति दिखाओ 

 जैसे, कुरान, पुराण, वेद, बाइबिल, इंजील, तौरेत, पहले, ये मत दिखाओ, ब्राम्हण, मौलाना, पहले, स्वयं की, मेहनत की रोटी और सम्पत्ति दिखाओ, फिर कहो, ये देखो, ये हमारी मेहनत की रोटी है, ये हमारी मेहनत की सम्पत्ति है, फिर कहना, हम यह धर्मशास्त्र पढ़ते हैं, लेकिन, पढ़ाते नहीं हैं, यदि कहा, हम हठधर्मी से धर्मशास्त्र पढ़ाते हैं, यह कहा, तब मुसीबत हो जायेगी, जिसे पढ़ाते हो, उसे, पूरा महिना भर का खर्चा, लाकर देना होगा, उसे श्रोता को, गुलाम, दास, नहीं कह सकते, किसी काम के लिए, हुकुम, आदेश, नहीं दे सकते, क्योकि, आपने उसकी, आजादी स्वतंत्रता छीना है, इसलिए, सभी जानते हैं, आपने, उस जीव की रचना, पालन पोषण नहीं किया है, अतह, हठधर्मी से, बातें नहीं मनवा सकते

मुसलमानों पर जुल्म होगा तो क्यूँ होगा ये नहीं पता बस मालूम है कुरान में लिखा है मुसलामानों पर जुल्म होगा, क्या इसलिए जुल्म होगा की अल्लाह की इबादत कर्ता है अथवा इसलिए जुल्म होगा क्योंकि वो गुनाह करते है, और जानते हैं इनकी नस्ल यही करेगी,

    सभी धर्म के लोग नागरिक तीन कानून पसन्द केरेंगे
    क्योंकि सभी ब्राम्हण मुस्लिम ईसाई सिख्ख जैनी बौद्धिष्ट नागरिक दुष्ट भ्रष्ट धर्म-प्रचारक से परेशान हैं सभी लोग मुक्ति चाहते हैं।
तीन कानून लाओ सभी धर्म-समुदाय सुख चैन से रहो।

    हम कानून देने आये हैं लेने नहीं हमारे पास कानून है क्या यह कानून सरकार न्यायलय और नागरिक के पास है हम सृजित-पक्ष सृजन-कर्ता पक्ष से परेशान हैं यही विवाद देश में है।

ध्यान दें मुस्लिम समुदाय सत्यापित साक्ष्य प्रस्तुत किया

मेरे देश में , सारे संसार रचयिता को, कमजोर बताने वाला, आध्यात्म का प्रचार प्रसार नहीं करेंगे,
मुस्लिम समुदाय के ब्यक्ति, मौलाना, इमाम, जिहादी ने सत्यापित साक्ष्य प्रस्तुत किया  सृष्टि रचना इतिहास, संसार और सारे संसार रचयिता का इतिहास, धरती रचना इतिहास और रचना जीवन इतिहास, मानव इतिहास सही बताई जाय अन्यथा हम कत्ल कर देंगे गलत जानकारी देने वाले का परिवार तबाह कर देंगे घर गाँव तबाह कर देंगे। तुम्हारी महिलाओं का बलात्कार पर बलात्कार करेंगे बीच सड़क पर बलात्कार करेंगे फांसी पर चढ़ा देंगे, आप मुस्लिम समुदाय का इतिहास देख लो इसलिए मुस्लिम समुदाय सृष्टि रचना इतिहास, धरती रचना इतिहास और रचना जीवन इतिहास, मानव इतिहास सही बताएँगे। अन्यथा भारत हिन्दुस्तान का न्यायालय गलत जानकारी देने वाले मुस्लिम समुदाय के ब्यक्ति, मौलाना, इमाम, जिहादी का कत्ल कर देने का निर्देश जारी कर देंगे। क्योकि यही शिक्षा आप मुस्लिम समुदाय ने पूरी दुनियां की सरकार न्यायालय और आम नागरिक को दिया है उसी शिक्षा अनुसार भारत हिन्दुस्तान का न्यायालय निर्देश जारी कर देंगे। किसी मुस्लिम को आपत्ति हो तब उचित उत्तर दें सृष्टि रचना इतिहास, संसार और सारे संसार रचयिता, धरती रचना इतिहास और रचना जीवन इतिहास, मानव इतिहास के सम्बन्ध में गलत जानकारी देने वाले मुस्लिम समुदाय के ब्यक्ति, मौलाना, इमाम, जिहादी को क्यों जीवित छोड़ दें 

क्या ब्राम्हण मौलाना के पास समाधान है

क्या, ब्राम्हण, मौलाना के पास, समाधान है, क्या, धरती के मुसलमानों के पास, ब्राम्हणों के पास, ब्राम्हण-हिन्दू, ब्राम्हण-मुस्लिम, मध्य, विवाद का समाधान है, बिना हथियार, बिना तनाव पूर्ण, ध्यान दें, समस्या का समाधान, मुस्लिम कौम के पास नहीं है, ब्राम्हणों के पास नहीं है,ब्राम्हण-हिन्दू, ब्राम्हण-मुस्लिम मध्य, विवाद का कोई सही समाधान, दोनों के पास नहीं है, ये दोनों आध्यात्म शास्त्र दिखायेंगे, एक, कुरान दिखायेगा, दूसरा, वेद पुराण दिखायेगा, ये दोनों शास्त्र, ब्राम्हण-हिन्दू, ब्राम्हण-मुस्लिम, मध्य, विवाद का समाधान नहीं बताते, पूछ कर देख लो

ब्राम्हण पूरा पागल हो मुझसे पूछ रहे हो ब्रम्हा विष्णु महेश शिव की बात नहीं मानोंगे, वेद पुराण की बात नहीं मानोंगे, प्रश्न हैं ब्राम्हणों यह प्रश्न किससे पूछना चाहिए देश और राष्ट्र को हजारों वर्ष से किससे परेशानी है क्या रामसजीवन भारतीया से आपका देश परेशान होता रहा है इसलिए यह प्रश्न पूछा है, पूछना है तो मुस्लिम से पूंछो 

संसार के लोगों को कब ज्ञान बनाया हुआ संसार को अल्लाह ने बनाया मुसलमान अपने मस्तिष्क का कितना प्रतिशत उपयोग करता है किस 

क्या सारे संसार बनाने वाले से आप अधिक बुद्धिमान जगत धारण कर्ता से अधिक बुद्धिमान से
संसारी किस आधार पर किसी एक आध्यात्म शास्त्र को सही मानेगा, साक्ष्य के आधार पर अथवा हथियारों बाहुबल और भीड़ के आधार पर, 
अथवा दिमांग बन्दी मुहबंदी लोभ के आधार पर किसी एक आध्यात्म शास्त्र को सही मानेगा 

क्या आप अल्लाह भगवान से ज्यादा जानते हैं

यह प्रश्न करने वाले कौन लोग हैं, आपका राष्ट्र किस विचार धारा के लोगों से परेशान हो,
क्या मेहनत करके खाने वाले हैं, 
मुफतवादी, 
एक आध्यात्म शास्त्र का पाठक, 
धरती के इतिहास को नहीं जानने वाला, 
विज्ञान शास्त्र अध्धयन नहीं करता,
जुनूनी, 
उन्मादी, 
आध्यात्म शास्त्र का ब्यापारी ,
ऐय्याशी उद्देश्य धारी, 

क्या ब्राम्हण वेद-पुराण, मुस्लिम को देश से बाहर निकाल सकते हैं नहीं। 

    वेद-पुराण और ब्राम्हणों में सामर्थ्य नहीं मुस्लिम ईसाई को देश से बाहर कर सकें वेद-पुराण और ब्राम्हण केवल हठधर्मी सिखाता है, मुफ्तवादी ब्राम्हण कहता है धर्म पूजा-पाठ स्तुति मत छोडो जबकि स्वतंत्र अवस्था में मुस्लिम दरवाजे पर खड़ा नहीं होना चाहिए था लेकिन पुरे भारत में मुस्लिम दबदबा बनाकर रखा है ब्राम्हण अपाहिज बना बैठा है क्योंकि ब्राम्हण मुफ्त खोर है ब्राम्हण को मुफ्त सुख सुविधा ऐश्वर्य शासन प्रदान करने वाली ब्यवस्था चाहिए
    इसलिए ब्राम्हण शान्त बैठें अब से सारे हिन्दू मंदिरों का दान चंदा सरकारी आध्यात्मिक खजाना में जमा होगा सारे हिन्दू ब्राम्हणों के गलत आचरण पर दान चंदा उपहार लेने पर थप्पड़ लगायेंगे पांच से दस थप्पड़ अकड़ दिखाने पर बीस थप्पड़ देखना सारे मुस्लिम मौलाना इमाम की हालत खराब हो जाएगा उन्हें भी डर सताने लगेगा कहीं मुस्लिम नागरिक मौलाना इमाम के गलत आचरण पर  दान चंदा उपहार लेने पर थप्पड़ मारना शुरू ना कर दें क्योकि हमने साबित किया है अल्लाह का इबादत करने वाला आलसी निकम्मा हो जाता है मेहनत करके नहीं खा सकता 
मुसलमानों के अनुसार, सारे शैतानों के नाम हैं, पहला, भगवान भी शैतान है, दूसरा, परमात्मा भी शैतान है, तीसरा, ईश्वर भी शैतान है, चौथा, ब्रम्हा भी शैतान है, पांचवा, परब्रम्ह भी शैतान है, छठवा, परमेश्वर भी शैतान है, सातवा, आदि शक्ति भी शैतान है मुसलमानों के अनुसार केवल अल्लाह शैतान नहीं है हम, सभी हिन्दू, ईसाई,  बौद्धिष्ठ, सिख्ख, जैनी, प्रतीक्षा कर रहे हैं, मुस्लिम मौलाना कब तक, भगवान, परमात्मा, ईश्वर, ब्रम्हा, परब्रम्ह, परमेश्वर, आदि शक्ति, नामक, शैतानों से, मुक्ति दिलाओगे,


  

धरती के इतिहास पुरातत्वेता वैज्ञानिक रिपोर्ट से ज्ञात होता है अमुक नामधारी ने संसार की रचना नहीं किया
अतः अमुक नाम धारी को संसार रचयिता बताने पर प्रतिबन्ध लगाई जाती है यह गलत इतिहास है भारत में आध्यात्मिक ब्यक्तियों के द्वारा गलत इतिहास बताने पर जेल का प्रावधान सुनिश्चित की गयी है, ऐसे जानकारी पर प्रतिबन्ध लगाई जा चुकी है भारत न्यायालय निर्देश अनुसार
 सभी आध्यात्मिक धर्मगुरु क्या कुरान पुराण वेद के साथ इतिहास पुरातत्वेता रिपोर्ट संलग्न है

दान चंदा लेने पर सुनवाई नहीं होगी

1- दान चंदा लेने पर प्रतिबन्ध हटाने से सम्बंधित याचिका कर्ता ब्यक्ति अथवा समूह मुफ्त वादी है अथवा परिश्रम वादी है जब तक ज्ञात नहीं हो जाता तब तक दान चंदा लेने पर सुनवाई नहीं होगी
2-जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाता सभी आध्यात्मिक धर्मगुरु धार्मिक नेता प्रचारक शारीरिक परिश्रम करके खाने लगे हैं तब तक दान चंदा उपहार लेने पर सुनवाई नहीं होगी पहले सत्यापित करें ईश्वर भगवान परमात्मा देवी शिव अल्लाह यहोवा नबी पैगम्बर देवी देवता का उपासक परिश्रमी होता है

भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए दो से छह महिना लगेगा

मुस्लिम राष्ट्र बनाने हेतु शर्तें 

1- 25 कानून लागू होगा
2- तीन कानून लागू होगा
3- एक भी गैर मुस्लिम की हत्या नहीं होगी
4- किसी भी गैर मुस्लिम का बलात्कार नहीं होगा
5- भारत में कभी शरिया कानून लागू नहीं होगा केवल ह्युमन राइट्स , आपराधिक कानून लागू होगा
6- प्रत्येक नागरिक की आध्यात्मिक उपासना स्तुति की स्वतंत्रता सुरक्षित रहेगी निराकार से आकार के मध्य जो स्तुति योग्य हो उनमें से जिसकी भी स्तुति करना चाहते हैं नागरिक के पास इसकी स्वतंत्रता सुरक्षित रहेगी
7- बाहुबल बूते, भीड़ के बलबूते, आध्यात्म की बातें नहीं मनवाई जायेगी, विज्ञानी साक्ष्य दिखायेंगे, जो ऐसा नहीं करेंगे, वह ब्यक्ति अथवा समूह उस परिवार को मासिक खर्च की धनराशी उपलब्ध कराएँगे यह धनराशी शारीरिक परिश्रम से प्राप्त धनराशी होनी चाहिए  परिवार को मासिक खर्च देने हेतु दान सहयोग चंदा से प्राप्त धनराशी स्वीकार्य नहीं होगी,
मुसलमानों को, उपरोक्त शर्ते स्वीकार है, तब मै रामसजीवन भारतीया, भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनानें के लिए तैयार हूँ,

एक कहानी

    सारे संसार वाला संसार वाला को बहुतों ने सब्जी मंडी बना रखा है उसकी उपासना से नहीं डरते लेकिन उसके बन्दों उपासकों से डरते हैं क्या ऐसा होना सही है
    एक पहाड़ के दोनों तरफ, समुंद्र है, पहाड़ की चोटी पर,  एक चट्टान, चिल्ला कर कह रहा है, मैं लुढ़कूंगा
नीचे, कुछ छोटे, कुछ बड़े चट्टान कह रहे हैं, मत लुढ़को, लेकिन चट्टान नहीं माना, वह कहा, मैं लुढ़कूंगा, मुझे कोई नहीं रोक सकता है नीचे कुछ सिपाही ने रोकने की कोशिश किया लेकिन नहीं माना तब सिपाही ने कहा ठीक है लुढ़कने दो सभी चट्टान किनारे हो गए
    वह चट्टान लुढ़कने लगा और सीधा छपाक से समुन्द्र में चला गया अब वह डूबने लगा और गहरे में जाता रहा तब ऊपर आ रहे किसी चट्टान ने कहा जब तक परिश्रम नहीं करोगे तब तक ऊपर नहीं जा सकते यह इस समुद्र का नियम है फिर उसे परिश्रम करना सिखाया तब वह चट्टान भी ऊपर की और आने लगा और समुद्र किनारे आया और विश्राम किया
    सिपाही ने कहा चट्टान महोदय चोटी से लुढ़कने का और परिश्रम करने का आनन्द आया, वह चट्टान बोला, हमने आज तक इतना परिश्रम नहीं किया था, लुढ़कना आसान था, लेकिन ऊपर आना कठिन है सिपाही बोला ठीक है विश्राम कर लिया हो तो, ऊपर चोटी की तरफ आगे बढ़ो, वो देखो ऊपर की ओर जाने वाले, सभी चट्टान भी कभी तुम्हारी तरह बहुत बड़े चट्टान थे लेकिन कितने छोटे छोटे हो गए हैं उन्हें भी लुढ़कने से मना किया गया था लेकिन नहीं माने तब चट्टान ने पूछा बड़े चट्टान कैसे बनेंगे सिपाही बोला पहाड़ के उस पार समुद्र में जाकर मेहनत करके बड़े चट्टान पुनः बन सकते हो लेकिन इस तरफ के समुद्र में बड़े नहीं बन सकते,
    उस तरफ के समुद्र में जाकर कभी भी बिना परिश्रम के चोटी पर समुद्र की गहराई में आ जा सकते हो लेकिन इस तरफ के समुद्र में बिना मेहनत के ऊपर नीचे नहीं आ जा सकते लेकिन बड़े होने के लिए मेहनत करना होता है
यह कहानी, मुसलमानों के लिए है, मुसलमान, मौलाना भी, यही कहता है, हमारा, कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता, हम बहुत बड़े मालिक के बन्दे हैं,

29 July 2024

कल्पना में भी मुसलमान के बारे में बुरा लिखना और कहना नहीं

     मुसलमान हथियार हठधर्मी भीड़ बूते बात मनवाता है यह संसार रचयिता सम्मान की हानि है प्रत्यक्ष साक्ष्य बूते बातें मनवाए

ध्यान दें हमें समस्या दुष्ट भ्रष्ट धर्म-गुरुओं से दुष्ट आध्यात्मिक ब्यक्तियों से है मुस्लिम भी परेशान हिन्दू भी परेशान ईसाई भी परेशान समस्या का कोई हल निकलना चाहिए कल्पना में भी अपराध मत करना और यथार्थ में अपराध मत करना न्यायालय बताये
    किस अपराध को प्राथमिकता देंगे देश यथार्थ में अपराध से संघर्ष कर रहा है मुस्लिम राष्ट्र हो ईसाई राष्ट्र हो हिन्दू राष्ट्र हो परिकल्पना में किया अपराध से कोई आहत नहीं होगा केवल परमशक्ति परम श्रधेय सर्वभूतेषु विशालक्षेत्रे विद्यमान सर्वभूतेषु आधार शक्ति रूपेण आकार निराकार सर्वकार्येशु सर्वदा शक्ति रुपेंण के सिवा
   लेकिन यथार्थ में किया गया अपराध से कथन से लेख से वचन से प्रभावित ब्यक्ति पीड़ित होगा लेकिन ब्लॉग में पहले ही सावधान कर दिया गया है सावधान आपकी भावना आहत हो सकती है अपनी जिम्मेदारी पर पढ़ें  यह रफ कार्य टाइम पास कल्पना पर आधारित लेख लिखा है
अमेरिका भारत पर प्रतिबन्ध लगाएगा तीन और पच्चीस कानून से डर जाएगा वह भारत को ईसाई राष्ट्र बनाना चाहता है लेकिन तीन और पच्चीस कानून को अपने राष्ट्र में लागू करने से मना नहीं कर सकता
पाकिस्तान तीन और पच्चीस कानून लागू करवाना चाहेगा लेकिन अपने राष्ट्र में लागू नहीं करेगा

हमारा क्या उखाड लोगे ब्राम्हण

आध्यात्मिक दुष्ट-भ्रष्ट मुक्त भारत बनाने के लिए लाया गया

दलितों को प्रश्नों में उलझा के सारे ब्राम्हण बताओ हमारा क्या उखाड़ लोगे,
जिसने तुम्हारा उखाड़ा है अस्तित्व, उन्हें बताओ उनका क्या उखाड़ लोगे,
हजारों वर्षों से परेशान हो ब्राम्हणों, हिन्दू हिन्दू रटते आज क्या लक्ष्य दोगे,
अब लक्ष्य कोई स्वीकार नहीं करेगा, इतिहास देखो,बताओ कैसे भुला दोगे,
अटल जी से पहले, सब विकाश पथ मिटाया, ब्राम्हण, अब क्या जवाब दोगे
तीन कानून लाओ भारत में, सारे दुष्ट मुसलामानों को भारत से निकाल दोगे
अज्ञानता का नाश ज्ञान का प्रकाश होगा मुस्लिम होंठों को भी मुस्कान दोगे

अतः तीन कहावत है

     1 सिधवा का मुह कुत्ता चाटे 2 कमजोर को गीदड़ खा जाये 3 टेढ़वा देख शेर भी घबराये 4 मुफ्त का खाने वाला गाँव गाँव नरियाय परिश्रम का धन मांगो दुम दबाके भाग जाय 4 मुफ्त खाय गाँव गाँव नरियाय मेहनत करने बोलो दुम दबाके भाग जाय 
    ऐसे हैं दुष्ट भ्रष्ट मौलाना इमाम जिहादी ब्राम्हण दुष्ट भ्रष्ट साधू संत महंत धर्मप्रचारक धर्मसंरक्षक यह कहावत दोनों तरफ हो जाए तब परिणाम क्या मिलेगा देश और नागरिक किससे परेशान है मुफ्त-वादियों ऐय्याशी से आध्यात्म ग्रन्थ का दुरूपयोग करने वालों से
दुनियां हमारे माँ बाप की हो गयी है जब से पुराण कुरान हदीस हमारे हाँथ आ गई है
( नारी परेशान है इसलिए माँ शब्द ठीक नहीं )
बचके कहाँ जाओगे न्यायालय सरकार हथियार बन्दुक मिसाइल हमारे हाँथ आ गयी है
हम खुन बहा देंगे रक्त पात कर देंगे हर गली गर मजहब धर्म की तरफ आँख उठाई
कहा न्यायालय पहले जेब खाली करो दोनों तुम्हारा पूरा जुर्म का हिसाब देखो आ गई है
दान चंदा लिया वषों से लालच लोभ देकर अब प्रतिबन्ध लगाने की देखो बात आ गई है
पसीना बहाओ हर राह मंजिल बहादुर कितने बुद्धिमान कितने देखो जवाब आ गई है
ये मत कहना कान खोलकर सुन लो न्यायालय सरकार धर्म इतिहास पुरानी हो गई है
अपराध दस वर्ष पहले का था बहुतों का देखो सजा उनको महीनों पहले हो गयी है
तीन कानून पढ़ो तुम्हारा अपराध हजारों वर्ष पुराना था देखो हिसाब आज हो गयी है
पुराण कुरान हदीस हाँथ आ गई है तो ये मत कहना दुनिया हमारे बाप की हो गयी है 
सामने छल करने वाला ना होता तो छल का अनुभव हमारे पास ना होता
जानता हूँ छल करा जाएगा बात बिगड़ जाएगा इसलिए कम बोलता हूँ

राज्य की न्यायालय और प्रसाशन का सन्देश

छत्तीसगढ़ राज्य, राज्य की न्यायालय और प्रसाशन, यह स्वीकार नहीं करता, संसार रचयिता, जगत जीव धारण पोषण कर्ता की शक्तियां, कमजोर हैं, छत्तीसगढ़ का कानून की जानकारी रखिये , पहला कानून, छत्तीसगढ़ न्यायालय का निर्देश, कोई भी छत्तीसगढ़ राज्य में, उदाहारण, साक्ष्य, ब्यवहार प्रस्तुत नहीं करेंगे, 
जिससे, यह सत्यापित होता है, संसार रचयिता, जगत जीव धारण, पोषण कर्ता की, शक्तियां कमजोर हैं, वह बिना हथियार, बिना हठधर्मी के, बाहुबल और भीड़ के बूते किसी ब्यक्ति के माध्यम से, परेशान किये बिना, वह श्रेष्ठ आध्यात्म की स्थापना, और सुरक्षा नहीं कर सकता, दूसरा कानून, पुलिस प्रसाशन को निर्देश दिया जाता है, उपरोक्त निर्देश का उलन्घन करने वाले, आध्यात्मिक ब्यक्ति, और आध्यात्म प्रचारक, आध्यात्म संस्थापक पर, कड़ी कार्यवाई किया जाए, उनका ब्यवसाय प्रतिबंधित किया जाय, उनके द्वारा पीड़ित परिवार को, हर्जाना दिलाया जाय, चाहे अजन्मा का उपासक हो, अथवा, जगत धारण पोषण कर्ता का उपासक हो 
तीसरा सन्देश, आम नागरिक, संसार, सारे संसार रचयिता से, भयभीत नहीं होते, केवल पाप कर्म से, अपराध से भयभीत होते हैं,  इसलिए, उसके उपासक, आध्यात्म प्रचारक, आध्यात्म संस्थापक से आध्यात्म अनुयायी से, आम नागरिक भयभीत नहीं होंगे, यदि, संसार, सारे संसार रचयिता के उपासक, आध्यात्म प्रचारक, आध्यात्म संस्थापक से, आध्यात्म अनुयायी से, आम नागरिक भयभीत हुआ, तब कड़ी कड़ी कार्यवाई किया जाए, उनका प्रभावी सन्देश समयकाल तक ब्यवसाय प्रतिबंधित किया जाय, उनके द्वारा पीड़ित परिवार को, हर्जाना दिलाया जाय,
जय हिन्द जय भारत वन्दे मातरम,

आध्यात्म गुरु ब्राम्हण मौलाना इमाम शारीरिक परिश्रम द्वारा अपनी रोजगार समस्या सुलझाने में असमर्थ होता है क्योकि, भगवान, अल्लाह का उपासक, आलसी निकम्मा हो जाता है, अतः प्रतिबन्ध लगाई जाय

कारण, आप, आध्यात्म उपासक ने, सत्यापित किया, आध्यात्म उपासक, शारीरिक परिश्रम करने में, परिश्रम करके खाने में, रोजगार समस्या, सुलझाने में, आध्यात्मिक विवाद सुलझाने में, सही निर्णय लेने में, असमर्थ होता है, 
अतह, न्यायालय निर्देश जारी करती है, ऐसा आध्यात्म उपासक, ब्राम्हण, साधू, संत, मौलाना, इमाम, जिहादी, आध्यात्म का, धर्म का, प्रचार प्रसार नहीं करेंगे, भगवान, परमात्मा, ईश्वर, अल्लाह, खुदा का उपासक, रोजगार समस्या का, स्वयं समाधान करेंगे, 
रोजगार समस्या का समाधान करने हेतु, सरकार बाध्य नहीं है, आम नागरिक की तरह आप स्वयं रोजगार खोज करें,

मुझे दो महिना लगेगा
भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए शांतिपूर्ण वातावरण में छह महिना लगेगा

कुरान सर्वत्र विद्यमान को अल्लाह नाम दे रख्खा है जबकि कुरान से पहले अल्लाह नाम धरती पर नहीं था आध्यात्म प्रचार हेतु जिनके कंधों पर मेहनत करके खाने की जिम्मेदारी सौपी गयी वे मुफ्तवादी ब्यवस्था को बढ़ावा दिया मुसलमान हथियार हठधर्मी भीड़ बूते बात मनवाता है यह संसार रचयिता शक्तियों का उनके सम्मान की हानि है

     मौलाना इमाम जिहादी अज्ञानी ब्यक्ति कुरान को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करता है जबकि विज्ञान इतिहास पुरातत्व से प्रत्यक्ष साक्ष्य बूते बातें मनवाना चाहिए और हमेशा मेहनत करके खाना चाहिए लेकिन मौलाना इमाम जिहादी अज्ञानी ब्यक्ति मुफ्त का खाता है और दिमाग बंदी शब्द का प्रयोग करता है

10 करोड़ देकर 100 करोड़ का धन्धा हिन्दू नेता बिक रहा

मुस्लिम कमिटी 10 करोड़ 100 करोड ले रही है 100 करोड़ देकर 1000 करोड ले रही है, क्या नुकसान है मुस्लिम को
रामसजीवन भारतीया

मुस्लिम को धिक्कार हैं रचयिता के सम्मान को हानि पहुँचाया है
मुस्लिम समुदाय अपने बच्चों को गलत इतिहास बताते हैं।

चार छः दस हजार वर्ष पूर्व धरती के किस समय के इतिहास में लिखा है, अल्लाह ने दुनिया बनाई।

     मुसलमान हथियार और फतवा के बलबूते विजयी होने का पूर्ण समर्थक है। जो नबी की बातों को कुरान की आयत को गलत कहे, उसका कत्ल कर दो। यह कथन कहने का आरोप किसके ऊपर है। जिसके द्वारा प्रत्येक जीव बनाये जाते हैं या उसके दूतों का कथन है।
     इसका अर्थ है संसार रचयिता का नियंत्रण सभी जीवों पर नहीं है। तब जीवों को बनाने के समय किसका नियंत्रण रहता है अथवा किसी मुफ्तवादि समूह ने परिवर्तन किया। कुरान की आयत का अर्थ बदलकर दुरूपयोग किया।कुरान बाइबिल से पहले किस धर्म समुदाय ने देवदूत ने कहा था संसार बनाने वाले की जो स्तुति नहीं करेगा उसका कत्ल कर दो।

श्रम सिद्धान्त प्रेरित सिद्धान्त

श्रम सिद्धांत प्रेरित सिद्धांत किसे कहते हैं रिपोर्ट मगाई जाए मेरी रिपोर्ट शारीरिक परिश्रम से किसी के द्वारा दिया पारिश्रमिक धनराशी का उपयोग करना यहाँ पारिश्रमिक मूल्य दाता अथवा प्राप्त कर्ता धनराशी का मूल स्वामी नहीं है जीवन पर्यंत उपयोग अधिकार सुरक्षित  है  वह सम्पत्ति संसार में पूर्व से विद्यमान है दोनों पक्ष उस सम्पत्ति के निर्माता नहीं है यह प्रत्यक्ष दर्शित है शरीर मुक्ति पश्चात धनराशी प्राप्त कर्ता साथ लेकर नहीं जाता यह प्रत्यक्ष दर्शित है।

दुष्ट मुसलमान को हिन्दुस्तान से भगायेंगे हथियार की आवश्यकता नहीं होगी

    मुसलमान मौलाना इमाम जिहादी अपनी जाल में फंस चूका है प्रत्येक जीव वनस्पति रचयिता के शरण में रह कर बहुत अपराध किया है वह कहता है सारे संसार की बनाने वाले की स्तुति करो नहीं तो कत्ल कर देंगे सारे संसार बनाने वाले का फरमान है जो उसकी इबादत नहीं करेगा उसका कत्ल कर दो यहाँ पर सारे संसार बनाने वाले का नाम अल्लाह बताते हैं कहते हैं यह उसका कथन है ठीक है चलो सारे संसार बनाने वाले की स्तुति करो ना नुकुर नहीं कहना विज्ञान देखो सारे संसार बनाने वाला कौन है और स्तुति करो

मुफ्तवादी दुष्ट ब्राम्हण कहाँ भागकर जाएगा, कहेगा असत्य कथन, सीधा जेल जाएगा

      ब्राम्हण की धूर्त लज्जित विचारधारा के कारण, मूर्ति पूजक हिन्दू एक साथ खड़े नहीं हैं, वह मुफ्त ऐश्वर्य और शासन मीडिया ब्यवसाय स्वामी, ब्राम्हण वेश में, विचरते हुए, मुफ्त ऐश्वर्य, सब सुख भोक्ता के स्थान पर, विराजमान रहना चाहता, यह सर्वथा अनुचित है, मुसलमान ब्राम्हण की हत्या कर देता है, ब्राम्हण शुद्र शब्द संबोधित समुदाय की हत्या कर देता है, इसी का परिणाम है, मुसलमान भारत हिन्दुस्तान में है, और ब्राम्हणों को सम्मान नहीं मिलता

यहीं पर ब्राम्हण मौलाना अपनी दुकान खोलता है

      गर्भ-जन्मा उपासक दुःख आभाव में रचयिता के सामने झुकता है यहीं पर मुफ्तवादी ब्राम्हण अपनी दुकान खोलता है मुफ्तवादी मौलाना भी दूकान खोलता है यह दुकान बंद हो जाए सभी आध्यात्मिक भावना से दी गई दान चंदा सहयोग की धन धनराशी सरकारी आध्यात्मिक कार्यालय ले जाए तब दोनों मुफ्तवादी दृढ़ विश्वाशी उन्मादी जुनूनी, अवसर वादी, लक्ष्यधारी उपासक, और मौलाना ब्राम्हण द्वारा जनित आध्यात्मिक पागलपन समाप्त हो जाए 
 
 

न्यायधीश सरकार महोदय दया नहीं दिखायेंगे

     न्यायधीश सरकार महोदय जिस दिन धनराशी देने की बारी आएगी। साधू संत फकीरों धर्मगुरु पर दया दिखाना छोड़ दोगे। दया दिखानी है तब उन लोगों पर दया दिखाएँ जिनके अधिकारों का हनन उन पर अत्याचार होता है।
     क्या इसका प्रश्न उत्तर साधू संत फकीरों धर्मगुरु के पास नहीं है।
1 साधू संत फकीरों धर्मगुरु को पालन पोषण की वस्तुएं कैसे कहाँ से उपलब्ध होगी।
2 भगवान परमात्मा अल्लाह के उपासकों को पालन पोषण की वस्तुएं परिश्रम से प्राप्त होगा अथवा मुफ्त बिना परिश्रम किये प्राप्त होगा।
साधू संत फकीरों धर्मगुरु पर दया दिखाने वाला ब्यक्ति और समूह साधू संत फकीरों धर्मगुरुओं को धनराशी उपलब्ध कराएँ दूसरों को विवश नहीं करेंगे।
    क्योकि मुफ्त-वादियों के कारण देश में तनावपूर्ण क्लेशपूर्ण समस्या है उन्हें गाँव शहर से बाहर मेहनत मजदूरी के लिए भेजना है इसलिए
     क्या प्रश्न कर्ता उत्तर दाता को धन उपलब्ध करायेंगे इसलिए प्रश्न पूछा प्रश्न क्या आप ईश्वर भगवान की स्तुति नहीं करोगे अथवा स्तुति करते हो तब साधू संतों फकीरों धर्मगुरु को दान नहीं दोगे।
     आम नागरिक ने नहीं कहा जाओ तुम उपासना स्तुति करो धर्मगुरु साधू संत फकीर बनों। ब्यक्ति स्वयं उस पथ पर विवश होकर चला अथवा लोभ में ऐय्याशी प्रसिद्धि मुफ्त मान सम्मान पाने हेतु आध्यात्मिक पथ पर चला।
     सामान्यतः सभी नागरिक परेशानी में सबसे कहते हैं ऊपर वाला को याद करो समस्या दूर होगी। परिश्रम करो बिना परिश्रम फल नहीं मिलता।
    सभी श्रेष्ठ धर्मगुरुओं साधू संतों फकीरों देश की भलाई चाहते हो तब सभी मेहनत करके खाओ दान उपहार चंदा सरकारी आध्यात्मिक खजाने में जाने दो कानून दान लेने पर आपका अधिकार नहीं है भगवान परमात्मा अल्लाह का उपासक आलसी निकम्मा होता है सरकार न्यायालय और हम स्वीकार नहीं करते।

न्यायालय शांत बैठा देख रहा है

       क्योकि हिन्दू धर्मगुरु ने धर्मशास्त्र दिखाया कहा धर्मशास्त्र में लिखा है ब्राम्हण दान लेकर जीवन यापन करेंगे 
न्यायालय कहा ठीक है जाओ घर में घुस के दान लेना मैं कुछ नहीं बोलूँगा
      मुस्लिम आया कुरान दिखाया कहा कुरान में  लिखा है अल्लाह के शिवा किसी और की इबादत करने वाला का कत्ल कर दो न्यायालय ने कहा कत्ल नहीं कर सकते पिटाई कर सकते हो हड्डी नहीं तोड़ना 
       ईसाई आया बाइबिल दिखाया कहा प्रभु ईशु तारणहार हैं उनके शिवा किसी और की स्तुति नहीं कराना है ब्राम्हण किसी और की स्तुति करा रहे हैं हम विरोध करेंगे 
 अब मुसलमान और ईसाई ने ब्राम्हण को खूब कुटा पिटा सारा दान धनराशी ले लिया ब्राम्हण चिल्लाने लगा न्यायालय कहा आपने हमें पुराण वेद दिखाया तो मैं चुप हो गया  मौलाना ने कुरान दिखाया तो मैं चुप हो गया ईसाई बाइबिल दिखाया तो मैं चुप हो गया लेकिन आपकी प्राण आपकी हड्डी सुरक्षित हैं 

न्यायालय और सरकार की औकात नहीं
भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने से रोके

    तीन व पच्चीस कानून सभी धर्म समुदाय के हित में है। तीन व पच्चीस कानून लागु करने में न्यायालय न्यायाधीश ज्यादा होशियारी दिखाया आनाकानी किया तब न्यायाधीश और सरकार को परेशानी हो जाएगी। कारण यदि मैं रामसजीवन भारतीया मुस्लिम के साथ उसके पक्ष में खड़ा हो गया तब भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने से रोक नहीं सकता जिस दिन खड़ा हुआ उसके दुसरे दिन घोषणा होगा 

     भारत मुस्लिम राष्ट्र है घोषणा के बाद सीधा न्यायालय में धावा बोला जायेगा कहा जायेगा न्यायालय निर्देश जारी करो भारत के सभी नागरिक नमाज पढ़ेंगे सारे संसार बनाने वाले का निर्देश है। सारे संसार बनाने वाले की स्तुति इबादत किया जाए कुरान साक्ष्य है। अतः संसार बनाने वाले की पांच समय स्तुति इबादत करेंगे हिन्दू ब्राम्हण इतिहास नहीं दिखाना क्योकि इतिहास कहता है वर्तमान की बात मानी जाए, हिन्दू ब्राम्हण इतिहास देख लो।


मुस्लिम कौम की सामर्थ्य नहीं

हिन्दू उसकी परम्परा की उपस्थिति में हिन्दू मुस्लिम विवाद समाप्त कर सके तीन कानून पच्चीस कानून विवाद समाप्त करने में सक्षम है


भारत को मुस्लिम मुक्त राष्ट्र बनना होगा

      भारत राष्ट्र को विश्व के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना होगा जिससे विश्व को सन्देश मिलेगा विश्व कहेंगे

देखो, किस तरह से, भारत, दुष्ट, आध्यात्मिक उपासक, कट्टरपंथी, आतंकवाद मुक्त हो गया है, भारत में, सभी धर्म के लोग, मिलकर शांति से रहते हैं, समस्त संसार रचयिता का उपासक, मौलाना, ब्राम्हण के कारण, किसी प्रकार का तनाव, निर्मित नहीं होता, क्योकि, समस्त संसार रचयिता के पक्ष में, खड़ा होकर, समस्त संसार रचयिता का उपासक, आध्यात्म गुरु, प्रचारक, किसी भी राष्ट्र में, तनाव नहीं बढ़ा सकते, भारत ने, उदाहरण सहित, साक्ष्य प्रस्तुत किया है, भारत ने, उदाहरण सहित समझाया, समस्त संसार रचयिता का उपासक, आध्यात्म गुरु, प्रचारक का कर्तब्य बनता है, आप, राष्ट्र और विश्व में, अशान्ति का विनाश करे, अशान्ति फैलाने का, कार्य नहीं करेंगे, जो तनाव बढ़ाएगा, उन पर, तीन कानून लागु होगा, तब, सिर्फ मेहनत करके, खाओगे, दान चंदा लिया, तब, सीधे जेल जाओगे, और तनाव बढ़ाना, भूल जाओगे, आध्यात्म शास्त्र दिखाना, भूल जाओगे, आप, स्वयं बताये, समस्त संसार रचयिता का, उपासक, आपके राष्ट्र में है, लेकिन, फिर भी, देश गाँव शहर के लोग, और सरकार भी परेशान हैं, यह नहीं होना चाहिए।

एक लाइन में कहूँ समस्त संसार रचयिता का उपासक देश में रहेगा। इसलिए कोई भी आरोप नहीं लगा सकते की यह कानून मुस्लिम मुक्त भारत बनाने के लिए लाया गया है क्या मुस्लिम समस्त संसार रचयिता की उपासना नहीं करते समस्त संसार रचयिता की उपासना पर कोई प्रतिबन्ध नहीं लगा सकते। स्वतन्त्र सैद्धांतिक नियम के साथ

ब्राम्हणों क्या कहते हो प्राण जाए तो जाए लेकिन दान चंदा ना जाए

ब्राम्हणों दान चंदा चाहिए अथवा मौलाना जनित तनाव से मुक्त भारत चाहिए ब्राम्हणों विचार कर लो, न्यायालय को ऐसा कोई भी कानून नहीं दिया जाएगा जो कानून अथवा विचार यह कहता है कि मुस्लिम को भारत से भगाया जाएगा, हम बलपूर्वक हथियारों के बलबूते, भारत को मुस्लिम मुक्त करने की बात नहीं कहेंगे, मुस्लिम हथियारों के बलबूते, भारत में इस्लाम स्थापित किया, हम भारत बिना हथियार के, बिना तनाव के, मुस्लिम मुक्त भारत बनायेंगे, समस्त संसार रचयिता के पक्ष में, खड़ा होकर, समस्त संसार रचयिता का उपासक, किसी भी राष्ट्र में, तनाव नहीं बढ़ा सकते, समस्त संसार रचयिता का उपासक का कर्तब्य बनता है,

बेटों ने माँ की जवानी मांगी है

       बेटों ने माँ की जवानी मांगी है माँ बाप परेशान है बेटे की जवानी की प्यास कैसे बुझाऊं दुल्हन घर आने को तैयार नहीं कोई महिला सर झुकाने को तैयार नहीं दुनिया पालने बनाने वाला औरत देने को तैयार नहीं रास्ता बड़ा सरल है संसार का पूरा भेदा बताऊँ फिर पूछूं बता क्या तेरी जवानी की प्यास बुझाऊं बेटा बोला नहीं पहले मुक्ति का अनुमति सहयोग तो पाऊं

   आप मुस्लिम को ललकार नहीं सकते लेकिन मुस्लिम किसी की सत्य जानने की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगा सकते मुस्लिम सारे जमीं सारे आसमान की हर चीज को बनाने वाले से, पनाह माँगने लगता है, लेकिन पनाह मिल जाने के बाद इतराने लगता है, यही परिणाम प्रत्येक गर्भ जन्मा देता है,

मैं एक परिचय है

     मैं एक परिचय है मैं रामसजीवन भारतीया हूँ जिसे मिटा नहीं सकते परिचय मिटाने वाला को भी मिटना होगा इसे घमंड नहीं कह सकते परिचय आवश्यक है आप न्यायालय में चूहा बन जाते हो यहाँ बुद्धिमान बन जाते हो हम चूहा बन जाते हैं न्यायालय आध्यात्मिक भीड़ के सामने चूहा बन जाता है लेकिन हम नहीं हड्डी तोड़ने की सलाह देने वाले की हड्डी तोड़ दें कभी हड्डी तोड़ने की बात नहीं कहेगा वार्ता बूते न्यायालय चूहा है वार्ता बूते आध्यात्मिक भीड़ चूहा है mera brain thik se kaam nahin karata doctor report
घमंड नाशियों को घमंड नाशी मिलाना चाहिए अन्यथा खुद भी मरता रहेगा ओरों को मारता रहेगा
दो प्रकार के मुफ्त वादी हैं 1- एक मुफ्त वादी से समस्या समाप्त होती है 2- एक मुफ्त वादी से समस्या निर्मित होती है न्यायालय में प्रत्यक्ष और मुफ्त वादी की बातें सुना नहीं जाएगा आध्यात्म शास्त्र की बातें नहीं सुना जायेगा जो मेहनत की नहीं खायेगा वह न्यायालय में आध्यात्म शास्त्र नहीं दिखायेंगे कितना भी बड़ा धर्मगुरु अथवा समूह हो जिसकी बातें न्यायालय तक पहुचाई गयी है क्या वह आध्यात्मिक ब्यक्ति परिश्रम करके खाता है

आध्यात्म का प्रचार करने हेतु क्या मुफ्त प्राप्त धन की आवश्यकता है अथवा केवल आध्यात्म शास्त्र की आवश्यकता है

2500 साल पहले किस राष्ट्र में इस्लाम का अस्तित्व था गलत जानकारी सीधा जेल होगा संसार की सम्पत्ति किसी नामधारी की सम्पत्ति नहीं है संसार में ब्यवस्थापिका नीति प्रभावी परिणाम दे रहा है

यह पाजिटिव रिजल्ट देगा

कानून किसकी तरफ से आना चाहिए था
1 श्रोता पक्ष --------- 2 उपदेशक पक्ष
उत्तर- उपदेशक पक्ष से 
किसकी तरफ से आया है
1 श्रोता पक्ष --------- 2 उपदेशक पक्ष 
उत्तर- श्रोता पक्ष सूअर खाने वाला की तरफ से 
क्या उपदेशक पक्ष कह सकता है हम ऐसा कानून लेकर आये है जो कहता है
1-आध्यात्मिक ब्यक्ति कभी सृष्टि रचना धरती रचना मानव जीवन इतिहास के सम्बन्ध में गलत जानकारी देने वाला नहीं पहुंचेगा 
2- दुष्ट भ्रष्ट मुफ्त वादी और गलत आचरण का आध्यात्मिक ब्यक्ति आम नागरिक तक उपदेश देने नहीं पहुंचेगा
3- बाहुबल भीड़ के बलबूते आध्यात्मिक बातें मनवाने वाला आम नागरिक तक नहीं पहुंचेगा

विश्व को सन्देश देना आवश्यक है

मुस्लिम मुक्त भारत होना आवश्यक है विश्व को सन्देश देना आवश्यक है मुस्लिम ने हथियार बलबूते भीड़ बूते हठधर्मी बलबूते इस्लाम विस्तार किया 
लेकिन भारत ने मुस्लिम को बिना हथियार, बिना भीड़, बिना हठधर्मी के पीछे ढकेल दिया भारत से बाहर कर दिया 
पूरी मुस्लिम कौम बिना हथियार हिन्दू मुस्लिम विवाद नहीं मिटा सकता ये है भारत की ताकत एक अकेला ब्यक्ति खड़ा है बिना हथियार, बिना भीड़, बिना हठधर्मी के हिन्दू मुस्लिम विवाद समाप्त करवाने के लिए 

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, शुक्राचार्य की वंशावली इस प्रकार है:

शुक्राचार्य वंशावली
शुक्राचार्य की मां का नाम दिव्या था और वह दैत्यराज हरिण्यकश्यप की पुत्री थीं.
शुक्राचार्य के पिता का नाम भृगु ऋषि था, जो ब्रह्मा के पुत्र थे.
शुक्राचार्य के भाई का नाम मय दानव था, जिन्हें विश्वकर्मा भी कहा जाता है. मय दानव दैत्यों के भवन, अस्त्र-शस्त्र, और रथ बनाते थे. महाभारत काल में उन्होंने इंद्रप्रस्थ नगर का निर्माण किया था, जो पांडवों की राजधानी थी.
शुक्राचार्य भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद के भांजे थे.
शुक्राचार्य के दो विवाह हुए थे:
पहला विवाह दैत्यराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा से हुआ था. शर्मिष्ठा से उनके तीन पुत्र हुए थे, जिनके नाम द्रुहु, पुरु, और अनु थे.
दूसरा विवाह देवयानी से हुआ था. देवयानी से उनके दो पुत्र हुए थे, जिनके नाम यदु और तुर्वसु थे.
शुक्राचार्य का जन्म नाम 'शुक्र उशनस' था. पुराणों के मुताबिक, वे असुरों (दैत्य, दानव, और राक्षस) के गुरु और पुरोहित थे.
वे महादेव के भक्त थे और उन्होंने शिव की तपस्या करके मृत संजीवनी विद्या हासिल की थी.
इस विद्या की मदद से दैत्यों को हर युद्ध में जीत मिलती थी और देवताओं को हार का सामना करना पड़ता था.
जो दैत्य युद्ध में मारे जाते थे, उन्हें शुक्राचार्य जीवित कर देते थे
जिब्रील, एक देवदूत हैं जिनका उल्लेख यहूदी, ईसाई, और इस्लाम धर्मों की कथाओं में मिलता है. इस्लाम में, जिब्रील को प्रधान देवदूत माना जाता है. जिब्रील के बारे में कुछ और बातेंः
जिब्रील, ईश्वर और मनुष्यों के बीच मध्यस्थ के रूप में काम करते हैं.
जिब्रील, नबियों के लिए रहस्योद्घाटन का वाहक हैं.
जिब्रील ने पैगंबर मुहम्मद को कुरान का ज्ञान दिया था.
जिब्रील ने अल्लाह के शब्दों को कुरान के रूप में मुहम्मद तक पहुंचाया था.
जिब्रील को अच्छी ख़बर लाने वाला माना जाता है.
बाइबल साहित्य में गेब्रियल को जिब्रील का समकक्ष माना जाता है.
जिब्रील का ज़िक्र क़ुरान और हदीस दोनों में मिलता है.
हदीस, पैगंबर मुहम्मद की बातें हैं, जिन्हें उनके करीबी लोगों ने याद किया और सुनाया.
हदीसों के छह विश्वसनीय संग्रहों में कुल 29,578 हदीसें हैं:
सहीह बुख़ारी: इसमें 7,225 हदीसें हैं. संग्रहकर्ता अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद-बिन-इस्माईल बुख़ारी हैं.
सहीह मुस्लिम: इसमें 4,000 हदीसें हैं. संग्रहकर्ता अबुल-हुसैन मुस्लिम बिन अल-हज्जाज हैं.
जामी अत-तिर्मिज़ी: इसमें 3,891 हदीसें हैं. संग्रहकर्ता अबू ईसा मुहम्मद बिन ईसा तिर्मिज़ी हैं.
सुनन अबू दाऊद: इसमें 4,800 हदीसें हैं. संग्रहकर्ता अबू दाव़ूद सुलैमान बिन अशअस सजिस्तानी हैं.
सुनन इब्ने माजह: इसमें 4,000 हदीसें हैं. संग्रहकर्ता इब्न माजह हैं.
सुनन अन-नसाई: इसमें 5,662 हदीसें हैं. संग्रहकर्ता अन नसाई अबू अब्दुर्रहमान बिन शुऐब ख़ुरासानी हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के इतिहास से जुड़ी कुछ खास बातें:
अफ़ग़ानिस्तान में ईसा से 1,800 साल पहले आर्यों का आगमन हुआ था.
  • अफ़ग़ानिस्तान में बौद्ध धर्म का प्रचार होने के बाद यह बौद्धों का गढ़ बन गया.
  • अफ़ग़ानिस्तान में कई साम्राज्यों का गठन हुआ, जिनमें ग्रीको-बैक्ट्रियन और मुगल साम्राज्य प्रमुख थे.
  • अफ़ग़ानिस्तान में दुर्रानी राजवंश के साथ आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान की शुरुआत हुई.
  • अफ़ग़ानिस्तान पर ब्रिटिश साम्राज्य और रूसी साम्राज्य के बीच ग्रेट गेम हुआ था.
  • अफ़ग़ानिस्तान को 9 अगस्त, 1919 को ब्रिटिश अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से स्वतंत्र घोषित किया था. 
  • अफ़ग़ानिस्तान में 1973 में ज़हीर शाह को उखाड़ फेंका गया और अफ़ग़ानिस्तान गणराज्य की स्थापना हुई. 
  • अफ़ग़ानिस्तान में 1992 से 1996 के बीच मुजाहिदीन गुटों ने नियंत्रण के लिए लड़ाई लड़ी. 
  • अफ़ग़ानिस्तान में वर्तमान में तालिबान का शासन है. 
  • अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद, गरीबी, और बाल कुपोषण की समस्याएं हैं. 
  • वर्तमान में 15 अगस्त 2021 को तालिबान ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया। अमेरिका ने यह फैसला लिया था कि अफगानिस्तान से वह अपने सभी सैनिकों को अपने देश में लेकर आएगा। जैसे ही अमेरिकी सेना अपने देश लौट गई, तब तालिबान ने बहुत तेजी से पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। लेकिन वहाँ के लोग उनके खिलाफ आंदोलन( कारवाही) कर रहे हैं जिनमे पंजशीर के जूनियर मसूद अहमद और अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह मुख्यत: है तालिबान ने क़ाबुल पर कब्ज़ा जमाया हुआ है और बंदूक की नोक पर एक आतंकी सरकार का गठन किया जिससे वहाँ के लोगो में दहशत का माहोल बना हुआ हैं खासकर महिलाओं में क्योंकि उन्होंने तालिबान का पूर्व शासन देखा है जिसमें महिलाओं का कोई सम्मान नहीं था। फिलहाल अफगानिस्तान के उज्ज्वल भविष्य पर दुःख और अशांति के बादल मंडरा रहे हैं।

जय हिन्द जय भारत वन्दे मातरम्

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