दान दाता और दान ग्रहण करने वाला — सम्पत्ति का स्वामी नहीं

जगत्-रचना और सम्पत्ति का मूल स्वामी रचयिता है। दाता और ग्रहणकर्ता केवल व्यवस्था करने वाले हैं — न कि अन्तिम स्वामी।

दान देने या लेने वाला व्यक्ति किसी भी वस्तु (अनाज, फल-फूल, धन, पशु-पक्षी आदि) का अंतिम स्वामी नहीं होता। यह सत्य निम्न बातों से स्पष्ट है:

  • रचना-क्रम: पहले सूरज-धरती-चन्द्रमा आदि बने; फिर इन पर वनस्पति और जीवो का निर्माण हुआ — इसलिए सम्पत्ति की उत्पत्ति रचयिता-निर्मित है। यह स्वतः सिद्धान्त पर आधारित रचना है
  • स्वामित्व का सिद्धांत: दान दाता और दान प्राप्तकर्ता केवल व्यवस्थापक हैं — वे केवल देने/लेने की क्रिया में संलग्न होते हैं।
  • हक़-हिसाब नहीं: कोई भी मानव यह दावा नहीं कर सकता कि वह सम्पत्ति का परम स्वामी है; इसलिए 'दान देने का अंतिम अधिकार' किसी व्यक्ति या संस्था के पास नहीं ठहरता।
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